बिहार में भी बहुत जल्द लगेंगे अबैध बुचर खानों पर रोक :बिहार सरकार
पटना। उत्तर प्रदेश के बाद अब बिहार में भी अवैध बूचड़खाने बंद किए जाएंगे। सरकार जिलों में चल रहे वैध बूचड़खाने पर भी नजर रखेगी। इस सिलसिले में सभी जिलों के डीएम व एसपी को पत्र लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि वे अवैध बूचड़खानों को तत्काल बंद करा मुख्यालय को रिपोर्ट भेजें। -
साथ ही वैध बूचड़खानों पर भी कड़ी नजर रखी जाए। विधान परिषद में शनिवार को भाजपा के सूरजनंदन प्रसाद के सवाल पर पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश में अवैध रूप से पशुओं का वध करने की इजाजत नहीं है।
इस संबंध में 2012 में ही आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर दिए गए थे। इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी डीएम व एसपी से वैध बूचड़खानों की सूची मांगी गई है। बिहार में एक्ट की उड़ाई जा रही धज्जियां पशु संरक्षण एवं संवर्द्धन अधिनियम, 1955 के तहत पशुओं का वध किया जा सकता है।
मगर एक्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि 15 साल से अधिक आयु और शारीरिक रूप से अक्षम पशुओं का ही वध किया जा सकता है। इसके लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। लेकिन बिहार में इस कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। प्रदेश में कम आयु के पशुओं का वध किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार राज्य में करीब डेढ़ सौ बूचड़खाने चल रहे हैं, जिसमें से आधा दर्जन को भी लाइसेंस नहीं है। बताया जाता है कि किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार में अवैध बूचड़खानों की संख्या सबसे अधिक है।
पशुओं पर क्रूरता रोकने को लेकर डीएम की अध्यक्षता में हर जिले में पहले से कमेटी गठित है, जो पशुओं पर अत्याचार रोकने के लिए अभियान चलाती है। लेकिन यह अभियान ज्यादातर पशुओं की तस्करी को रोकने तक ही सीमित रहता है।
By- Ravi gupta
साथ ही वैध बूचड़खानों पर भी कड़ी नजर रखी जाए। विधान परिषद में शनिवार को भाजपा के सूरजनंदन प्रसाद के सवाल पर पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश में अवैध रूप से पशुओं का वध करने की इजाजत नहीं है।
इस संबंध में 2012 में ही आवश्यक दिशा निर्देश जारी कर दिए गए थे। इस मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी डीएम व एसपी से वैध बूचड़खानों की सूची मांगी गई है। बिहार में एक्ट की उड़ाई जा रही धज्जियां पशु संरक्षण एवं संवर्द्धन अधिनियम, 1955 के तहत पशुओं का वध किया जा सकता है।
मगर एक्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि 15 साल से अधिक आयु और शारीरिक रूप से अक्षम पशुओं का ही वध किया जा सकता है। इसके लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। लेकिन बिहार में इस कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। प्रदेश में कम आयु के पशुओं का वध किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार राज्य में करीब डेढ़ सौ बूचड़खाने चल रहे हैं, जिसमें से आधा दर्जन को भी लाइसेंस नहीं है। बताया जाता है कि किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार में अवैध बूचड़खानों की संख्या सबसे अधिक है।
पशुओं पर क्रूरता रोकने को लेकर डीएम की अध्यक्षता में हर जिले में पहले से कमेटी गठित है, जो पशुओं पर अत्याचार रोकने के लिए अभियान चलाती है। लेकिन यह अभियान ज्यादातर पशुओं की तस्करी को रोकने तक ही सीमित रहता है।
By- Ravi gupta

nice
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